ताभ्यां स शकलाभ्यां च दिवं भूमिं च निर्ममे ।
मध्ये व्योम दिशश्चाष्टावपां स्थानं च शाश्वतम् ॥
उन दो खण्डों से उन्होंने द्युलोक(स्वर्ग) और पृथ्वी की रचना की। उनके मध्य में आकाश, आठों दिशाएँ, तथा जल का शाश्वत स्थान(समुद्र आदि) निर्मित किया।
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