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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 12
तस्मिन्नण्डे स भगवानुषित्वा परिवत्सरम् । स्वयमेवात्मनो ध्यानात् तदण्डमकरोद् द्विधा ॥
उस हिरण्यगर्भरूप अण्ड में भगवान् ने एक परिवत्सर (एक दिव्य वर्ष) तक निवास किया। तत्पश्चात् उन्होंने अपने ही ध्यान और संकल्प से उस अण्ड को दो भागों में विभक्त कर दिया।
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