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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 116
वैश्यशूद्रोपचारं च सङ्कीर्णानां च सम्भवम् । आपद्धर्मं च वर्णानां प्रायश्चित्तविधिं तथा ॥
वैश्य और शूद्र का कर्तव्य - मिश्रित जातियों का जन्म - संकट के समय सभी जातियों का कर्तव्य - प्रायश्चित की विधि।
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