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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 110
एवमाचारतो दृष्ट्वा धर्मस्य मुनयो गतिम् । सर्वस्य तपसो मूलमाचारं जगृहुः परम् ॥
इस प्रकार यह देखकर कि सही व्यवहार से पुण्य मिलता है, ऋषियों ने सही व्यवहार को सभी तपस्याओं का मूल माना।
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