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मनुस्मृति • अध्याय 1 • श्लोक 106
इदं स्वस्त्ययनं श्रेष्ठमिदं बुद्धिविवर्धनम् । इदं यशस्यमायुष्यं इदं निःश्रेयसं परम् ॥
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