जल को 'नार' कहा गया है, क्योंकि वे नर(परम पुरुष) से उत्पन्न हुए हैं। और चूँकि वे प्रारम्भ में उनका आश्रय(आयन) थे, इसलिए वे 'नारायण' नाम से स्मरण किए जाते हैं।
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