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मंत्रिका • अध्याय 1 • श्लोक 9
शंसन्तमनुशंसन्ति बह्वृचाः शास्त्रकोविदाः। रथन्तरं बृहत्साम सप्तवैधैस्तु गीयते ।।
शास्त्रज्ञ जन ऋचाओं के माध्यम से तथा स्तोता जन (स्तुतियों के द्वारा) उसी परम पुरुष की स्तुति करते हैं और उसी के लिए रथन्तर संज्ञक तथा बृहत्साम को सप्तविध गान करते हैं।
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