सर्व साधारण द्वारा दुही जाती और याज्ञिकों द्वारा यजन की जाती हुई इस माया रूपी गौ का वह भगवान्(ऐश्वर्यशाली)ध्यान(चिन्तन) और क्रिया(यौगिक क्रिया) द्वारा उपभोग करता है और उसे अत्यन्त व्यापक बनाता जाता है।
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