गौरनाद्यन्तवती सा जनित्री भूतभाविनी।
सितासिता च रक्ता च सर्वकामदुधा विभोः॥
यह गौरुपी माया उत्पत्ति और प्रलय से युक्त है, सबकी सहायिका है, प्राणी मात्र की पोषिका है। यह श्वेत, कृष्ण और रक्तवर्ण(सत्, रज, तम) है तथा सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाली है।
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