अन्य किसी प्रकार से भी ध्यान किया जाए, तो भी उस परमात्म चेतना को अज्ञानी पुरुष नहीं देख सकते, क्योंकि जगत् में विकारों को जन्म देने वाली, अज्ञान रूप वाली, आठरूप वाली(पंचभूत, मन, बुद्धि, अहंकार), अजन्मा(प्रकृति रूप)माया का प्रभाव अविचल रहता है।
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