कोई उसे चौबीस संख्यक तत्त्वों वाला(सांख्य दर्शन), कोई उसे व्यक्त(जगत्) और कोई अव्यक्त(प्रकृति) मानते हैं।
कोई उसे द्वैत(जीव-ब्रह्म) और कोई अद्वैत(ब्रह्म) मानते हैं।
इसी प्रकार कोई उसे तीन रूपों(ब्रह्मा, विष्णु, महेश) वाला और कोई पाँच रूपों वाला(ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गौरी और गणेश) मानते हैं।
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