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मंत्रिका • अध्याय 1 • श्लोक 14
तं षड्विंशक इत्येते सप्तविंशं तथापरे। पुरुषं निर्गुणं सांख्यमथर्वशिरसो विदुः॥
कोई उसे छब्बीसवाँ तत्त्व कहते हैं, कोई सत्ताईसवाँ तत्त्व कहते हैं। अथर्वशिर (उपनिषद्) के ज्ञाता उसे निर्गुण सांख्यपुरुष कहते हैं।
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