कोई उसे छब्बीसवाँ तत्त्व कहते हैं, कोई सत्ताईसवाँ तत्त्व कहते हैं।
अथर्वशिर(उपनिषद्) के ज्ञाता उसे निर्गुण सांख्यपुरुष कहते हैं।
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