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मंत्रिका • अध्याय 1 • श्लोक 10
मन्त्रोपनिषदं ब्रह्म पदक्रमसमन्वितम्। पठन्ति भार्गवा ह्येते ह्यथर्वाणो भृगूत्तमाः॥
मन्त्रों का रहस्य ही ब्रह्म है, उसी को भृगुवंशी श्रेष्ठ ‘भार्गव’ लोग अथर्ववेदीय पद और क्रम के अनुसार पढ़ते हैं।
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