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माण्डूक्य • अध्याय 1 • श्लोक 6
एष सर्वेश्वरः एष सर्वज्ञ एषोऽन्तर्याम्येष योनिः सर्वस्य प्रभवाप्ययौ हि भूतानाम्‌ ॥
यह (आत्मा) ही सबका स्वामी (ईश्वर) है। यह सब कुछ जानने वाला (सर्वज्ञ) है। यह सबके भीतर रहने वाला नियंत्रण करने वाला (अंतर्यामी) है। यह ही समस्त सृष्टि का मूल कारण (उत्पत्ति का स्रोत) है। इसी से सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है और अंत में सब इसी में विलीन हो जाते हैं।
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