जहाँ सोया हुआ व्यक्ति न कोई इच्छा करता है और न कोई स्वप्न देखता है, वह अवस्था सुषुप्ति (गहरी नींद) कहलाती है।
इस अवस्था में आत्मा—
- सब कुछ में एकरूप (एकीकृत) हो जाती है,
- शुद्ध चेतना का घन (पूर्ण चेतन स्वरूप) होती है,
- आनंदमय होती है और उसी आनंद का अनुभव करती है,
- और चेतना का द्वार (कारण रूप) बनती है—उसे प्राज्ञ कहते हैं।
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