यह सम्पूर्ण जगत् वास्तव में ब्रह्म ही है। यह आत्मा भी ब्रह्म है। और यह आत्मा(अनुभव की दृष्टि से)चार पादों(चार अवस्थाओं या रूपों) वाला कहा गया है।
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