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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 53
दम्यनाशकृते मङ्किरमृतत्वं किलागमत्। अच्छिनत् काममूलं स तेन प्राप महत्सुखम् ॥
बछड़ों के नाश को निमित्त बनाकर ही मङ्कि अमृतत्व को प्राप्त हो गये। उन्होंने काम की जड़ काट डाली; इसीलिये महान् सुख प्राप्त कर लिया।
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