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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 49
एष ब्रह्मप्रतिष्ठोऽहं ग्रीष्मे शीतमिव हृदम्। शाम्यामि परिनिर्वामि सुखं मामेति केवलम् ॥
जैसे ग्रीष्म ऋतु में लोग शीतल जल वाले सरोवर में प्रवेश करते हैं, उसी प्रकार अब मैं परब्रह्म में प्रतिष्ठित हो गया हूँ, अतः शान्त हूँ, सब ओर से निर्वाण को प्राप्त हो गया हूँ। अब मुझे केवल सुख-ही-सुख मिल रहा है।
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