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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 48
कामानुबन्धं नुदते यत् किञ्चित् पुरुषो रजः । कामक्रोधोद्भवं दुःखमह्रीररतिरेव च ॥
मनुष्य काम से सम्बन्ध रखने वाला जो कुछ भी रजोगुण हो, उसे दूर कर दे। दुःख, निर्लज्जता और असन्तोष - ये काम और क्रोध से ही उत्पन्न होने वाले हैं।
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