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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 46
प्रहाय कामं लोभं च सुखं प्राप्तोऽस्मि साम्प्रतम् । नाद्य लोभवशं प्राप्तो दुःखं प्राप्स्याम्यनात्मवान् ॥
इस समय काम और लोभ का त्याग करके मैं प्रत्यक्ष ही सुखी हो गया हूँ; अतः अजितेन्द्रिय पुरुष की भाँति अब लोभ में फँसकर दुःख नहीं उठाऊँगा।
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