मैं सदा सन्तुष्ट एवं स्वस्थ इन्द्रियों से सम्पन्न रहकर भाग्यवश जो कुछ मिल जाय, उसी से जीवन-निर्वाह करता रहूंगा; परंतु तुझे कभी सफल न होने दूंगा; क्योंकि तू मेरा शत्रु है।
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