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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 41
परित्यजामि काम त्वां हित्वा सर्वमनोगतीः । न त्वं मया पुनः काम वत्स्यसे न च रंस्यसे ॥
काम! मैं अपनी सम्पूर्ण मनोवृत्तियों को दूर हटाकर तेरा परित्याग कर रहा हूँ। अब तू फिर मेरे साथ न तो रह सकेगा और न मौज ही कर सकेगा।
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