तू तत्त्वज्ञान से रहित और बालक के समान मूढ़ है, तुझे सन्तोष देना कठिन है। आग के समान तेरा पेट भरना असम्भव है। तू यह नहीं जानता कि कौन-सी वस्तु सुलभ है और कौन-सी दुर्लभ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मंकिगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मंकिगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।