अर्थलोलुपता दुःखमिति बुद्धं चिरान्मया ।
यद् यदालम्बसे काम तत्तदेवानुरुध्यसे ॥
धनलोलुपता दुःख का कारण है, यह बात बहुत देर के बाद मेरी समझ में आयी हैं। काम! तू जिस-जिसका आश्रय लेता है, उसी-उसी के पीछे पड़ जाता है।
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