धनमस्येति पुरुषं पुरो निघ्नन्ति दस्यवः ।
क्लिश्यन्ति विविधैर्दण्डैर्नित्यमुद्वेजयन्ति च ॥
जिस पुरुष के पास धन होने का संदेह होता है, उसे उसका धन लूटने के लिये लुटेरे मार डालते हैं अथवा उसे तरह-तरह की पीड़ाएँ देकर सताते और सदा उद्वेग में डाले रहते हैं।
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