दरिद्र को सहस्र-सहस्त्र तिरस्कार सहने पड़ते हैं; अतः निर्धन अवस्था में बहुत-से कष्टदायक दोष हैं; और धन में जो सुख का लेश प्रतीत होता है, वह भी दुःखों से ही सम्पादित होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मंकिगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मंकिगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।