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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 23
नूनं ते हृदयं काम वज्रसारमयं दृढम् । यदनर्थशताविष्टं शतधा न विदीर्यते ॥
काम! निश्चय ही तेरा हृदय फौलाद का बना हुआ है, अतएव अत्यन्त सुदृढ़ है। यही कारण है कि सैकड़ों अनर्थों से व्याप्त होने पर भी इसके सैकड़ों टुकड़े नहीं हो जाते।
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