नूनं ते हृदयं काम वज्रसारमयं दृढम् ।
यदनर्थशताविष्टं शतधा न विदीर्यते ॥
काम! निश्चय ही तेरा हृदय फौलाद का बना हुआ है, अतएव अत्यन्त सुदृढ़ है। यही कारण है कि सैकड़ों अनर्थों से व्याप्त होने पर भी इसके सैकड़ों टुकड़े नहीं हो जाते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मंकिगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मंकिगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।