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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 22
न पूर्वे नापरे जातु कामानामन्तमाप्नुवन् । त्यक्त्वा सर्वसमारम्भान् प्रतिबुद्धोऽस्मि जागृमि ॥
पूर्वकाल के तथा पीछे के मनुष्य भी कभी कामनाओं का अन्त नहीं पा सके हैं, अतः मैं समस्त कर्मों का आयोजन त्यागकर सावधान हो गया हूँ और मैं पूर्णतः जग गया हूँ।
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