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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 2
श्रीभीष्म उवाच- सर्वसाम्यमनायासं सत्यवाक्यं च भारत । निर्वेदश्चाविधित्सा च यस्य स्यात् स सुखी नरः ॥
भीष्मजी ने कहा - भारत! सबमें समता का भाव, व्यर्थ परिश्रम का अभाव, सत्य-भाषण, संसार से वैराग्य और कर्मासक्ति का अभाव - ये पाँचों जिस मनुष्य में होते हैं, वह सुखी होता है।
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