श्रीभीष्म उवाच-
सर्वसाम्यमनायासं सत्यवाक्यं च भारत ।
निर्वेदश्चाविधित्सा च यस्य स्यात् स सुखी नरः ॥
भीष्मजी ने कहा - भारत! सबमें समता का भाव, व्यर्थ परिश्रम का अभाव, सत्य-भाषण, संसार से वैराग्य और कर्मासक्ति का अभाव - ये पाँचों जिस मनुष्य में होते हैं, वह सुखी होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मंकिगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मंकिगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।