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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 19
यदि नाहं विनाश्यस्ते यद्येवं रमसे मया। मा मां योजय लोभेन वृथा त्वं वित्तकामुक ॥
ओ धन की कामना वाले मन! यदि तुझे मेरा विनाश नहीं करना है। यदि तू इसी प्रकार मेरे साथ आनन्दपूर्वक रहना चाहता है तो मुझे व्यर्थ लोभ में न फँसा।
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