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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 16
यः कामानाप्नुयात् सर्वान् यश्चैतान् केवलांस्त्यजेत् । प्रापणात् सर्वकामानां परित्यागो विशिष्यते ॥
जो मनुष्य अपनी समस्त कामनाओं को पा लेता है तथा जो इन सबका केवल त्याग कर देता है - इन दोनों के कार्यों में समस्त कामनाओं को प्राप्त करने की अपेक्षा उनका त्याग ही श्रेष्ठ है।
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