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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 15
अहो सम्यक् शुकेनोक्तं सर्वतः परिमुच्यता । प्रतिष्ठता महारण्यं जनकस्य निवेशनात् ॥
अहो! शुकदेव मुनि ने जनक के राजमहल से विशाल वन की ओर जाते समय सब ओर से बन्धनमुक्त हो क्या ही अच्छा कहा था?
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