यदि वाप्युपपद्येत पौरुषं नाम कर्हिचित् ।
अन्विष्यमाणं तदपि दैवमेवावतिष्ठते ॥
यदि कभी कोई पुरुषार्थ सफल होता दिखायी देता है तो वहाँ भी खोज करने पर दैव का ही सहयोग सिद्ध होता है।
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