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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 11
उद्यम्योद्यम्य मे दम्यौ विषमेणैव गच्छतः । उत्क्षिप्य काकतालीयमुत्पथेनैव धावतः ॥
यह ऊँट मेरे बछड़ों को उछाल उछालकर विषम मार्ग से ही जा रहा है। काकतालीयन्याय से (अर्थात् दैवसंयोग से) इन्हें गर्दन पर उठाकर बुरे मार्ग से ही दौड़ रहा है।
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