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मंकिगीता • अध्याय 1 • श्लोक 10
कृतस्य पूर्व चानर्थैर्युक्तस्याप्यनुतिष्ठतः । इमं पश्यत सङ्गत्या मम दैवमुपप्लवम् ॥
पहले मैंने जो प्रयत्न किया था, उसमें अनेक प्रकार के अनर्थ खड़े हो गये थे। उन अनर्थों से युक्त होने पर भी मैं धनोपार्जन की ही चेष्टा में लगा रहा; परंतु देखो, आज इन बछड़ों की संगति से मुझ पर कैसा दैवी उपद्रव आ गया?
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