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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 25
यः शृणोति सकृद्वापि ब्रहौव भवति स्वयमित्युपनिषत् ॥ ॐ आप्यायन्तु ... ... ... इति शान्तिः ॥ ॥ इति मैत्रेय्युपनिषत्समाप्ता ॥
जो (मनुष्य) एक बार भी इस (मैत्रेयी) उपनिषद् का श्रवण करता है, वह स्वयं ब्रह्म ही हो जाता है। ऐसी ही यह उपनिषद् है।
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