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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 21
सर्वप्रकाशरूपोऽस्मि चिन्मात्रज्योतिरस्म्यहम् । कालत्रयविमुक्तोऽस्मि कामादिरहितोऽस्म्यहम् ॥
मैं सर्वप्रकाश स्वरूप हूँ तथा चैतन्य रूपी ज्योति भी मैं ही हूँ। तीनों कालों से परे अर्थात् मुक्त हूँ एवं मैं काम-क्रोधादि से रहित हूँ।
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