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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 20
अखण्डाकाशरूपोऽस्मि हाखण्डाकारमस्म्यहम् । प्रपञ्चमुक्तचित्तोस्मि प्रपञ्चरहितोऽस्म्यहम् ॥
मैं अखण्ड आकाश स्वरूप हूँ, अखण्डाकार भी मैं ही हूँ, मैं सांसारिक प्रपञ्चों से परे चित्त वाला हूँ तथा संसार प्रपञ्चादि से रहित हूँ।
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