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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 19
देशकोलविमुक्तोऽस्मि दिगम्बरसुखोऽस्म्यहम् । नास्ति नास्ति विमुक्तोऽस्मि नकाररहितोऽस्म्यहम् ॥
मैं देश और काल से रहित हूँ, दिगम्बर एवं आनन्द स्वरूप हूँ। यह नहीं है, यह नहीं है - इससे मैं मुक्त हूँ अर्थात् मैं अभावशून्य हूँ तथा 'नकार' से रहित भी मैं ही हूँ।
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