मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 17
यत्किंचिदपि हीनोऽस्मि स्वल्पमप्यति नास्म्यहम्। हृदयग्रन्थिहीनो ऽस्मि हृदयाम्बुजमध्यगः ॥
जो कुछ भी है, मैं उससे रहित हूँ, मैं अति अल्प और अत्यधिक भी नहीं हूँ। (मैं) हृदय की ग्रन्थि से रहित हूँ तथा हृदय कमल के मध्य में रहने वाला भी हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मैत्रेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मैत्रेय के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें