मुदितामुदिताख्योऽस्मि सर्वमौनफलो ऽस्म्यहम् ।
नित्यचिन्मात्ररूपोऽस्मि सदा सच्चिन्मयो ऽस्म्यहम् ॥
मैं आनन्द एवं शोक रूप हूँ, सर्वदा मौन रहने का फल रूप हूँ। नित्य चिद् रूप हूँ तथा मैं ही सच्चिद् रूप भी हूँ।
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