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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 15
सर्वेन्द्रियविहीनो ऽस्मि सर्वकर्मकृदप्यहम् । सर्ववेदान्ततृप्तोऽस्मि सर्वदा सुलभोऽस्म्यहम् ॥
मैं सभी इन्द्रियों से रहित हूँ, तब भी समस्त कर्म करने वाला मैं स्वयं ही हूँ। समस्त वेदान्त द्वारा सर्वदा तृप्त एवं सर्व सुलभ मैं ही हूँ।
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