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मैत्रेय • अध्याय 3 • श्लोक 13
लक्ष्यालक्ष्यविहीनोऽस्मि लयहीनरसोऽस्म्यहम्। मातृमानविहीनो ऽस्मि मेयहीनः शिवोऽस्म्यहम् ॥
मैं लक्ष्य एवं अलक्ष्य से विहीन हूँ तथा लय न होने वाला रस स्वरूप हूँ। मैं ही प्रमाण, प्रमेय और प्रमाता से रहित तथा मैं ही शिव स्वरूप हूँ।
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