चित्तादिसर्वहीनोऽस्मि परमोऽस्मि परात्परः ।
सदा विचाररूपोऽस्मि निर्विचारोऽस्मि सोऽस्म्यहम् ॥
मैं चित्त आदि सभी से रहित हूँ, मैं परात्पर (ब्रह्म) हूँ। मैं सर्वदा विचार रूप हूँ साथ ही विचारं से परे भी हूँ।
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