नवद्वारमलस्त्रावं सदा काले स्वभावजम्।
दुर्गन्धं दुर्मलोपेतं स्पृष्ट्वा स्त्रानं विधीयते॥
आँख, कान आदि नौ द्वारों से युक्त इस शरीर से सदा स्वाभाविक रीति से हर समय मल-स्रवित होता (निकलता) रहता है तथा इस मल की दुर्गन्ध से यह शरीर हमेशा परिपूर्ण रहता है, ऐसे इस दुर्गन्धयुक्त, मलिन शरीर का स्पर्श करने के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए।
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