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मैत्रेय • अध्याय 2 • श्लोक 4
जातं मृतमिदं देहं मातापितृमलात्मकम् । सुखदुःखालयामेध्यं स्पृष्ट्वा स्त्रानं विधीयते ॥
माता-पिता के मलरूप (शुक्रशोणित) से उत्पन्न, जन्म-मृत्यु वाले, सुख-दुःख के भण्डार-रूप एवं अपवित्र इस शरीर को स्पर्श करने के पश्चात् स्नान किया जाता है।
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