मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मैत्रेय • अध्याय 2 • श्लोक 22
अनुभूतिं विना मूढो वृथा ब्रह्मणि मोदते। प्रतिबिम्बितशाखाग्रफलास्वादनमोदवत् ॥
जिस प्रकार कोई भी मनुष्य शाखा के अग्र भाग में प्रतिबिम्ब के रूप में दिखाई देने वाले फल का रसास्वादन कर आनन्द प्राप्त करना चाहे, उसी प्रकार वास्तविक अनुभव के बिना अज्ञानी मनुष्य ब्रहा का आनन्द पाने की व्यर्थ कल्पना करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मैत्रेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मैत्रेय के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें