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मैत्रेय • अध्याय 2 • श्लोक 18
वमनाहारवद्यस्य भाति सर्वेषणादिषु। तस्याधिकारः संन्यासे त्यक्तदेहाभिमानिनः ॥
जिस मनुष्य को समस्त एषणाएँ-इच्छायें वमन किये हुए (उगले हुए) आहार के समान लगती हैं और जिसने शरीर की ममता त्याग दी है, उसको संन्यास का अधिकार है।
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