असंशयवतां मुक्तिः संशयाविष्टचेतसाम् ।
न मुक्तिर्जन्मजन्मान्ते तस्माद्विश्वासमाप्नुयात् ॥
जो मनुष्य संशयरहित हैं, वे ही मुक्ति को प्राप्त कर सकते हैं तथा जिन लोगों को संशय है, वे अनेक जन्मों के अन्त में भी मुक्त नहीं हो सकते। इसलिए गुरु एवं शास्त्र के वचनों पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।
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