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मैत्रेय • अध्याय 2 • श्लोक 11
विद्वान्स्वदेशमुत्सृज्य संन्यासानन्तरं स्वतः। कारागारविनिर्मुक्तचोरवदूरतो वसेत् ॥
जिस तरह से चोर कैदखाने से छूटकर दूर जाकर निवास करता है, वैसे ही ज्ञानी पुरुष को संन्यास ग्रहण कर अपने देश से दूर निवास के लिए चले जाना चाहिए।
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